फ़ना

 फ़ना न हो जाए यह सांस चल चल के,

ये रात बुझ बुझ के, चराग जल जल के ।


के अब जो तनहाँ हूँ तो खूब फ़ुरसत है,

मैं पहले रखता था हिसाब पल पल के ।


अमीर लोगों की अदा निराली है,

दिवालिया हैं दिल, लिबास मलमल के ।


Comments

Popular posts from this blog

ख़त

ज़िंदगी तेरे सावालात समझने के लिए