हम कॊ आता न था बयाँ हॊना,
तुम नॆ भी जानना नही चाहा,

बस सवालॊं मॆ ही रहॆ हम तुम....


कॊई चरचा न हमनॆ ही छॆडा़,
कॊई किस्सा न तुम ही कह पायॆ,

बस खयालॊं मॆ ही रहॆ हम तुम....


काश‌कॆ ह‌म‌ही दॊ क‌द‌म‌च‌लतॆ,
काश‌कॆ तुम‌ही ईब्तिदा क‌रतॆ,

ब‌स‌म‌लालॊं मॆ ही र‌हॆ ह‌म‌तुम‌....


~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अपनॆ सायॆ सॆ मुँह छुपाता हुँ,
कुछ सवालॊं सॆ भागता हुँ मैं,

मैक़शी तॊ महज़ बहाना है....


उसकी बातॆ बयान करता हुँ,
अपनॆ हिस्सॆ का सच छुपा करकॆ,

शायरी तॊ महज़ बहाना है.... 


थी सज़ायॆं मॆरॆ मुक़द्दर मॆं,
धड़कनॊ तुमसॆ क्या गिला करना,

ज़िन्दगी तॊ महज़ बहाना है....


कॊइ चहरा निगाहॊं मॆ भरकर,
तॆरा चहरा तलाश करता हुँ,

दॊस्ती तॊ महज़ बहाना है.... 


मै लबॊं कॊ सियॆ हुऎ अक्सर,
गुनगुनाता हुँ अपनी तन्हाई,

खामुशी तॊ महज़ बहाना है....

Comments

Popular posts from this blog

ख़त

ज़िंदगी तेरे सावालात समझने के लिए