ज़िंदगी तेरे सावालात समझने के लिए
तेरे मसले तेरे
हालात समझने के
लिए,
मैँ हुँ खामोश
तेरी बात समझने
के लिए...
मेरी ग़ज़ले हो हैं
आईना तेरी दुनिया
का,
मुझे पढ़िए मेरे जज़्बात
समझने के लिए...
वो दिए जिनको
अँधेरों पे तरस
आता है,
धूप में निक्लें
तो औकात समझने
के लिए...
साथ अपने ले
गया तु मेरी
सारी उलझन,
अब खुशी है,
न ही सदमात
समझने के लिए...
तेरे आगोश-ए-तसव्वुर में फिर
आया हुं 'क़श',
मीर ग़ालिब के ख़यालात
समझने के लिए....
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