~~~~हैं भी और नही भी हैं~~~~
हम वहाँ हैं भी और नही भी हैं,
दुरियाँ हैं भी और नही भी हैं....
खो गया है इसी शहर में कहिं,
जो मेरा हैं भी और नही भी हैं....
एक दरिया के दोनो साहिल हैं,
हम जुदा हैं भी और नही भी हैं....
बेदिली है तो बेदिली ही सही,
हम खफा हैं भी और नही भी हैं....
उसने आखोँ से कह दिया वो मुझे,
जनता हैं भी और नही भी हैं....
मिलने जुलने की खैर छोडो 'क़श'
राबता हैं भी और नही भी हैं....
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