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सच्चाई की मूरत

सर चढ़कर के बैठा है, पारा-वारा सब, इल्ली-दिल्ली, अटना-पटना, आरा-वारा सब| 'आप' जो कह दे एहतराम के क़ाबिल हो जाए, 'उवी-मूवी', 'सिंगर-विंगर', चारा-वारा सब| कितनी फबती है 'क़श' सच्चाई की मूरत पे, 'अफलर-मफ्लर', आंसी-खांसी, नारा-वारा सब|