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~~~~~सूरज~~~~~   ठन्डे बस्तों से निकलुं सूरज , अपनी स्याही मे मिला लुं सूरज ...   रास्ते तंग , अंधेरा भी है , अपने अंदर ही जला लुं सूरज ,   उम्र रिस्ती है बदन से मेरे , चाँद थामुं या सम्हलुं सूरज ,   हरिक ठोकर पे यकीं आया '' कश ' अबके उठ जाउं तो पा लुं सूरज